Kantara Movies

यह दुर्लभ ही है कि क्षेत्रीय भाषा की कोई फिल्म इतनी लोकप्रिय हो कि हिंदी या दूसरी भाषाओं में उसके डब वर्जन की मांग उठने लगे. दो हफ्ते पहले कन्नड़ में रिलीज हुई कांतारा के साथ यही हुआ है।

तीसरे शुक्रवार को यह फिल्म हिंदी में डब होकर आई है और आप कह सकते हैं कि कांतारा एक अनुभव करने वाला सिनेमा है. इसे कह-बोल कर समझाया नहीं जा सकता. दो हफ्ते पहले रिलीज हुई मणिरत्नम की पोन्नियिन सेल्वन 1 रिलीज हुई थी. 

इस फिल्म की कहानी और किरदार हिंदी पट्टी के दर्शकों के लिए इतने उलझे हुए थे कि इन्हें समझने में ही दिमाग खप जाता है. फिल्म का मजा तो दूर की बात है. मगर कांतारा के साथ ऐसा नहीं है.

कांतारा लोक कथाओं से प्रेरित है. यहां एक राजा के पास सब कुछ है, मगर सुख-शांति नहीं है. वह इसकी तलाश में निकल कर एक गांव में पहुंचता है, जहां पत्थर के रूप में मौजूद ग्राम देवता के दर्शन के साथ ही उसे असीम शांति की अनुभूति होती है. सुख मिलता है. 

राजा देवता को अपने महल में ले जाना चाहता है, तब देवता एक मनुष्य के शरीर में प्रवेश करके राजा से सवाल करता है कि मुझे यहां से ले तो जाओगे, बदले में गांव वालों को क्या दोगे. राजा कहता है कि जो आप कहेंगे. तब देवता कहता है

 तुम जोर से इन जंगलों में आवाज लगाओ और जहां तक तुम्हारी आवाज जाएगी, वहां तक की जमीन इन गांव वालों की. राजा ऐसा ही करता है और जहां तक उसकी आवाज जाती है, वहां तक की जमीन, जंगल-नदियां गांव वालों के हो जाते हैं.

 मगर सौ साल बीत जाते हैं और राजा के आधुनिक वंशज कहते हैं कि उनके पुरखे ने बेवकूफी करते हुए अपनी जमीन गांव वालों को दी. वे लोग गांव की जमीन वापस चाहते हैं और यहां से एक बेहद रोचक कहानी शुरू होती है.