Ahoi Ashtami 2022: अहोई अष्टमी का व्रत जारी, जानिये व्रत कथा और पूजा के शुभ मुहूर्त के बारे में

उत्तर भारत के कई राज्यों में लाखों महिलाओं ने अहोई का व्रत रखा है। संतान के सुख और तरक्की के लिए यह व्रत रखा जाता है।हिंदू पंचांग के अनुसार, सोमवार सुबह कार्तिक कृष्ण अष्टमी पर 9 बजकर 29 मिनट से अहोई का व्रत रखा गया है। अगले दिन यानी 18 अक्‍टूबर (मंगलवार) को सुबह 11 बजकर 57 मिनट पर इसका समापन होगा।

अहोई अष्टमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त सोमवार को शाम 6 बजकर 14 मिनट से लेकर शाम 7 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। इस लिहाज से अहोई अष्टमी पर पूजा की कुल अवधि 1 घंटा 14 मिनट की होगी। पूजा के दौरान अहोई माता से संतान के सुख और तरक्की के लिए आराधना की जाती है। 

दिनभर खाना होता है वर्जित

बता दें कि इस वर्ष अहोई अष्टमी व्रत सोमवार को शिवयोग में किया जा रहा है। यह व्रत माताएं अपनी संतान के स्वास्थ्य, विद्या, बुद्धि, बल व दीर्घायु के लिए करती हैं। महिलाएं पूरे दिन निराहार व्रत रहती हैं।

 इसके बाद शाम को तारा निकलने के बाद दीवार पर अहोई का चित्र बनाकर या अहोई अष्टमी पूजन के कैलेंडर से अहोई माता की पूजा करती हैं। इस व्रत में महिलाएं तारों और चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपना व्रत खोलती हैं। देश में यह व्रत करवाचौथ से चौथे दिन मनाया जाता है।

महिलाएं सुनें व्रत की कथा

व्रत कथा सुनते समय एक पटरे पर जल से भरा लोटा रखें। अहोई के चित्र के सामने रोली, चावल, धूप ,दीप, दूध, भात आदि पूजन सामग्री से पूजा करें। बायना पूजकर महिलाएं अपनी सासू मां, जेठानी या अन्य किसी बुजुर्ग महिला को दे दें।

शाम को होंगे तारों के दर्शन

पुजारियों की नानें तो महिलाओं को पूजा के बाद पहनी हुई चांदी की अहोई की माला दिवाली बाद ही उतारनी चाहिए। व्रत के दौरान शाम को कुछ महिलाएं तारा देख कर व्रत खोलती हैं और कोई चंद्रमा उदय के समय व्रत खोलती हैं। पुजारियों का कहना है कि सोमवार को चंद्रमा का उदय रात्रि 23:27 बजे होगा और तारे के दर्शन शाम को 6:15 बजे से होंगे।